साईं बैर ना कीजिए, गुरु पंडित कवि यार|
बेटा बनिता पंवरिया, यज्ञ करावन हार ||
यज्ञ करावन हार राज मंत्री जो होई |
विप्र, पडोसी, वैध्य आपको तपै रसोई||
कह गिरिधर कविराय,युगनते यह चलिआई|
इन तेरहसों तरह दिए बनि आवै साईं ||
साईं सब संसार में मतलब का ब्यवहार|
जब लग पैसा गांठ में, तब लग ताको यार||
तब लग ताको यार संगही संगमें डोलें|
पैसा रहा न पास यार मुखसे नहीं बोलें||
कह गिरिधर कवी राय जगत यही लेखा भाई |
बिनु बेगरजी प्रीति यार बिरला कोई साईं ||
साईं घोड़े आछतहि गदहन आयो राज|
कौआ लीजै हाथ में दूरि कीजिये बाज||
दुरी कीजिये बाज राज पुनि ऐसो आयो |
सिंह कीजिये कैद स्यार गजराज चढायो||
कह गिरिधर कविराय जहाँ यह बूझि बधाई|
तहां न कीजै भोर साँझ उठि चलिए साईं ||