Monday, January 3, 2011

प्रार्थना


                                                                                               
                                   
                                   


 




हमें  प्रभु!  दो  ऐसा  वरदान|
तन-मन-धन  अर्पण   कर  सारा  करें  सदा  गुणगान||
कभी ना तुमसे कुछ  भी चाहें   सुख-सम्पति-सम्मान|
अतुल   भोग  परलोक-लोकके  खिंच  ना  पावे  ध्यान||
हानि- लाभ  निंदा-स्तुति  सम हो  मान और अपमान|
सुख-दुःख विजय-पराजय सम हो बंधन-मोक्ष सामान||
निरखें   सदा  माधुरी  मूरति   निरुपम  रस  कि   खान|
चरण   कमल-मकरंद-सुधाका    करें    प्रेमयुत    पान||

27 comments:

  1. महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्‍वविद्यालय, वर्धा के ब्लॉग हिन्दी विश्‍व पर राजकिशोर के ३१ डिसेंबर के 'एक सार्थक दिन' शीर्षक के एक पोस्ट से ऐसा लगता है कि प्रीति सागर की छीनाल सस्कृति के तहत दलाली का ठेका राजकिशोर ने ही ले लिया है !बहुत ही स्तरहीन , घटिया और बाजारू स्तर की पोस्ट की भाषा देखिए ..."पुरुष और स्त्रियाँ खूब सज-धज कर आए थे- मानो यहां स्वयंवर प्रतियोगिता होने वाली ..."यह किसी अंतरराष्ट्रीय स्तर के विश्‍वविद्यालय के औपचारिक कार्यक्रम की रिपोर्टिंग ना होकर किसी छीनाल संस्कृति के तहत चलाए जाने वाले कोठे की भाषा लगती है ! क्या राजकिशोर की माँ भी जब सज कर किसी कार्यक्रम में जाती हैं तो किसी स्वयंवर के लिए राजकिशोर का कोई नया बाप खोजने के लिए जाती हैं !

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  2. बहुत सुंदर प्रार्थना ..भावों से भरी हुई ...शुक्रिया

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  3. सच्ची , सार्थक प्रार्थना।

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  4. अतुल भोग परलोक-लोकके खिंच ना पावे ध्यान||//
    waah ...what an expression !

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  5. आत्मिक शांति प्रदान करने वाली रचना है। आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

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  6. आध्यात्मिकता से पगी रचना. बहुत अच्छी लगी.

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  7. भावों से भरी हुई
    बहुत सुंदर प्रार्थना

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  8. आसानी से याद रखी जा सकने वाली बहुत ही सुन्दर प्रार्थना है.


    ऑडियो क्विज़'

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  9. bilkul sachchi parthna sachche man ki..... sunder prastuti.

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  10. सुन्दर अभिव्यक्ति .

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  11. सुन्दर प्रार्थना,
    बहुत - बहुत शुभ कामना

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  12. सुन्दर भजन .प्रभु से सार्थक कामनाएं/प्रार्थनाएं

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  13. सुन्दर प्रार्थना । नव वर्ष की शुभ कामनएं ।

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  14. मन को शांति प्रदान करने में भजन श्रेष्ठ सहायक होते हैं।
    ईश्वर इस भजन में वर्णित कामनाओं को पूर्ण करें।

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  15. बहुत सुन्दर प्रार्थना हैं।

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  16. आपको भी नया साल मुबारक हो।

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  17. यह प्रार्थना भाव मन के करीब लगा.बधाई एवं नववर्ष की शुभकामनाएं.

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  18. बहुत सुंदर प्रार्थना ...

    आपको और आपके परिवार को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं ...

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  19. mai bhi shamil hun aapki is sundar prarthna mein.

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  20. बहुत सुंदर प्रार्थना

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  21. हारे को हरिनाम! जिसे कुछ नहीं चाहिए,उसे ध्यानस्थ और ईश्वर को पा चुका ही मानना चाहिए।

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