Thursday, January 12, 2012

उत्तरायनी (घुघुतिया त्यौहार)

              कुमाऊ में मनाए जाने वाले घुघुतिया त्यौहार की अलग ही पहिचान है| त्यौहार का मुख्य आकर्षण कौवा है| बच्चे इस दिन बनाए गए घुघुते कौवे  को खिलते हैं| और कहते हैं "काले कावा काले घुघुति मावा खाले"|  बात उनदिनों की है जब कुमाऊ में चन्द्र वंश के राजा राज करते थे| राजा कल्याण चंद की कोई संतान नहीं थी| उसका कोई उत्तराधिकारी भी नहीं था| उसका मंत्री सोचता था कि राजा के बाद राज्य मुझे ही मिलेगा| एक बार राजा कल्याण चंद सपत्नी बाघनाथ के मन्दिर में गए और अपनी औलाद के लिए प्रार्थना की| बघनाथ की कृपा से उनका एक बेटा हो गया जिअका नाम निर्भय चंद पड़ा| निर्भय को उसकी माँ प्यार से घुघुति के नाम से बुलाया करती थी| घुघुति के गले में एक मोती की माला थी जिस में घुगरु  लगे हुए थे| इस माला को पहन कर घुघुति बहुत खुश रहता था| जब वह किसी बात पर जिद्द करता तो उसकी माँ उस से कहती कि जिद्द ना कर नहीं तो में माला कौवे को दे दूंगी| उसको डराने के लिए कहती कि "काले कौवा काले घुघुति माला खाले"| यह सुन कर कई बार कौवा आ जाता जिसको देखकर घुघुति जिद्द छोड़ देता| जब माँ के बुलाने पर कौवे आजाते तो वह उनको कोई चीज खाने को दे देती| धीरे धीरे घुघुति की कौवों  के साथ दोस्ती हो गई|
               उधर मंत्री जो राज पाट की उमीद लगाए बैठा था घुघुति को मारने की सोचने लगा| ताकि उसी को राजगद्दी मिले| मंत्री ने अपने कुछ साथियों के साथ मिल कर षड्यंत्र रचा| एक दिन जब घुघुति खेल रहा था वह उसे चुप-चाप उठा कर ले गया| जब वह घुघुति को जंगल की ओर ले के जा रहा था तो एक कौवे ने उसे देख लिया और जोर जोर से काँव काँव करने लगा|  उस की आवाज सुनकर घुघुति जोर जोर से रोने लगा और अपनी माला को उतार कर दिखाने लगा| इतने में सभी कौवे इकठे हो गए और मंत्री और उसके साथियों  पर मडराने लगे| एक कौवा घुघुति के हाथ से माला झपट कर ले गया| सभी कौवों ने एक साथ मंत्री और उसके साथियों पर अपने चौंच और पंजों से हमला बोल दिया| मंत्री और उसके साथी घबरा कर वहां से भाग खड़े हुए| घुघुति जंगल में अकेला रह गया| वह एक पेड़ के नीचे बैठ गया सभी कौवे भी उसी पेड़ में बैठ गए|
               जो कौवा हार लेकर गया था वह सीधे महल में जाकर एक पेड़ पर माला टांग कर जोर जोर से बोलने लगा| जब लोगों की नज़रे उस पर पड़ी तो उसने घुघुति की माला घुघुति की माँ के सामने डाल दी| माला सभी ने पहचान ली| इसके बाद कौवा एक डाल से दूसरे डाल में उड़ने लगा| सब ने अनुमान लगाया कि कौवा घुघुति के बारे में कुछ जनता है| राजाऔर उसके घुडसवार कौवे के पीछे  लग गए| कौवा आगे आगे घुड़सवार पीछे पीछे|
              कुछ दूर जाकर कौवा एक पेड़ पर  बैठ गया| राजा ने देखा कि पेड़ के नीचे उसका बेटा सोया हुआ है| उसने बेटे को उठाया, गले से लगाया  और घर को लौट आया| घर लौटने पर जैसे घुघुति की माँ के प्राण लौट आए| माँ ने घुघुति की माला दिखा कर कहा कि आज यह माला नहीं होती तो घुघुति जिन्दा नहीं रहता| राजाने मंत्री और उसके साथियों को मृत्यु दंड दे दिया| घुघुति के मिल जाने पर माँ ने बहुत सारे पकवान बनाए और घुघुति से कहा कि ये पकवान अपने दोस्त कौवों को बुलाकर खिला दे| घुघुति ने कौवों को बुलाकर खाना खिलाया| यह बात धीरे धीरे सारे कुमाऊ में फैल गई और इसने बच्चों के त्यौहार का रूप ले लिया| तब से हर साल इस दिन धूम धाम से इस त्यौहार को मानते हैं| मीठे आटे से यह पकवान बनाया जाता है जिसे घुघूत नाम दिया गया है| इसकी माला बना कर बच्चे मकर  संक्रांति के दिन अपने गले में डाल कर कौवे को बुलाते हैं और कहते हैं:-
"काले कौवा काले घुघुति माला खाले" ||
"लै कावा भात में कै दे सुनक थात"||
 "लै कावा लगड़ में कै दे भैबनों दगड़"||
"लै कावा बौड़  मेंकै दे सुनौक घ्वड़"||
 "लै कावा क्वे मेंकै दे भली भली ज्वे"||
          इसके लिए हमारे यहाँ एक कहावत भी मशहूर है कि श्रादों में ब्रह्मण और उत्तरायनी को कौवे मुश्किल से मिलते हैं|

29 comments:

  1. कहानी बहुत अच्छी लगी। लोकरंग की बात ही अलग है।आपको उत्तरायण की बधाई, सर्दी का प्रकोप कम होना चाहिये।

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  2. वाह, कौए मानव जीवन में कितना समाहित हैं, ऐसी लोककथाओं से ही पता चलता है।

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  3. बहुत ही रोचक लोककथा ..... पसंद आयी.

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  4. वाह, बहुत खूब, एकदम ताजी सी लगती कहानी.

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  5. ghughuti tyaar ki aapko bhi bahut bahut shubhkamnaye...kripya bageshwar ke uttrayani mele ke baare mein jaroor batayen..

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  6. बहुत बढ़िया!
    लोहड़ी पर्व के साथ-साथ उत्तरायणी की भी बधाई और शुभकामनाएँ!

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  7. यह कहानी पहले भी कहीं पढ़ी और सुनी थी किन्तु आपका प्रस्तुतीकरण का ढंग नवीनता लिए व निराला है. कहानी यद्यपि लोककथा के रूप में ही अधिक प्रचलित है परन्तु प्रभावोत्पादक है.
    प्रस्तुतीकरण के लिए आभार !

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  8. बहुत सुन्दर लगी आपसे सुनकर ये कथा! बधाई आपको भी!!

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  9. प्रेरक और रोचक कथा ...
    मकर संक्रांति की बधाई ...

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  10. घुघुतिया पर्व के बारे में जानकर सुखद लगा |मकर संक्रांति की बधाई और शुभकामनाएं

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  11. बहुत अच्छी कहानी और इसी के माध्यम से मनाये जाने वाले इस त्यौहार के बारे में जानना अच्छा लगा ...
    मकर संक्रांति की बहुत बहुत बधाई हो ...

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  12. बहुत रोचक कहानी और त्यौहार के मनाने का कारण जान कर बहुत अच्छा लगा...मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनायें!

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  13. उत्तरायनी एवं मकर संक्रांति आपको भी सपरवार मंगलमय हो।

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  14. घुघुतिया की रोचक जानकारी अच्छी लगी।
    मकर संक्रांति की शुभकामनाएं।

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  15. बहुत सुंदर रोचक रचना बहुत अच्छी लगी.....
    new post--काव्यान्जलि --हमदर्द-

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  16. घुंघतिया त्यौहार
    यानि कौओं से प्यार.

    आपके द्वारा प्रस्तुत कहानी से अच्छी जानकारी मिली.
    सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार.
    मकर सक्रांति की बधाई और शुभकामनाएँ.

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  17. रोचक त्यौहार
    मकर सक्रांति की बधाई और शुभकामनाएँ.

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  18. रोचक कहानी...
    अच्छी जानकारी भी..
    शुक्रिया..

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  19. नई जानकारी मेरे लिए.

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  20. har tyohar ke peechhe ek saral si kahani...in tyoharon ko jivant banaye rakhati hai...

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  21. रोचक दंत कथा .दरअसलचील - कोवे हमारे पर्यावरण के अवैतनिक सफाई कर्म चारी हैं इनका संरक्षण बहुबिध ज़रूरी है मर्म यहाँ है इस कथाका यही कि .ये जीव हमारे हितेषी हैं .

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  22. बहुत सुन्दर एवं रोचक कथा! बढ़िया लगा!

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  23. nice to know about this katha and kumaun culture.

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  24. बहुत बढ़िया जानकारी

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  25. बहुत सुंदर...जानकारी। मैंने भी अपने ब्लॉग में अपने गाँव में होने वाले घुघुतिया त्यार के बारे में थोड़ा बहुत लिखा है आपको भी जरूर पसंद आएगा। http://gopubisht.blogspot.in/2014/01/blog-post.html

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