Wednesday, September 21, 2011

तजुर्बे का फल

बहुत समय पहले की बात है| एक बार एक राजा शिकार खेलने के लिए जंगल में गए| शिकार के पीछे भागते भागते राजा रास्ता भटक गए| भटकते भटकते उन्हें रात हो गई| दूर एक जगह उन्हें रोशनी दिखाई दी वे रोशनी की तरफ बढे| वहां झोपड़ी में एक बुजुर्ग बैठा हुआ मिला| राजाने उस से रास्ता पूछा और कहा कि तुम यहाँ क्या करते हो| बुजुर्ग ने जवाब दिया कि मैं जमीदार की खेती की रखवाली करता हूँ; बदले में मुझे एक पाव आटा रोज का मिलता है| राजा को लगा बुजुर्ग आदमी तजरबे कार है इसको साथ ले चलना चाहिए| राजा ने कहा तुम मेरे साथ चलो में तुम्हें रोज का आधा किलो आटा दे दिया करूँगा| बुजुर्ग तैयार हो गया| दोनों राजमहल में चले गए| बुजुर्ग को एक कमरा देदिया गया| बुजुर्ग वहीँ आराम से रहने लग गया|
एक दिन एक घोड़े का व्यापारी घोड़े बेचने आया| राजा को एक घोडा बहुत पसंद आगया उसने सोचा कि इसमें बुजुर्ग कि भी राय ले ली जाय| उसने बुजुर्ग को बुलाया और कहा ये घोडा कैसा है| बुजुर्ग ने घोड़े के शरीर पर हाथ फेरा और बताया कि घोडा तो बहुत सुन्दर है पर गहरे पानी में घोडा बैठ जाएगा| राजा ने बुजुर्ग की सलाह को मानते हुए घोडा खरीद लिया| कुछ दिन बाद जब राजा उसी घोड़े पर शिकार के लिए जा रहा था तो रास्ते में एक नदी पर करते हुए जब घोडा गहरे पानी में गया तो बैठ गया| राजा को बुजुर्ग की बात याद आगई वह वापस आगया और बुजुर्ग को बुला कर पूछा कि तुन्हें कैसी पता लगा कि घोडा गहरे पानी में बैठ जाएगा| बुजुर्ग ने बताया कि जब में ने घोड़े के शरीर पर हाथ फेरा तो मुझे उसके जिगर में गर्मी महसूस हुई जिस से लगा कि घोडा गहरे पानी में बैठ जाएगा| राजाने घोड़े के व्यापारी को बुलाकर कारण जानना चाहा व्यापारी ने कहा कि बचपन में इस घोड़े कि माँ मर गई थी तो इसे भैंस का दूध पिलाकर पाला है जिस से इसके जिगर में गर्मी हो गई है| राजा ने बुजुर्ग के तजुर्बे से खुश होकर इनाम में उसे एक पाव आटा और दे दिया| अब बुजुर्ग को तीन पाव आटा रोज का मिलने लगा|
एक बार बैठे बैठे राजा के दिमाग में आया कि बुजुर्ग से में अपनी रानी के बारे में क्यों पूछूं|राजा ने बुजुर्ग को बुलाकर कहा कि आप बहुत तजुर्बे कार हैं, आप मेरी रानी के बारे में भी बताएँ बुजुर्ग ने कहा ठीक है आप रानी को बिलकुल नंगा कर के एक कमरे में बैठा दें तो में रानी के बारे में बता सकता हूँ| राजा ने वैसा ही किया रानी को नंगा करके एक कमरे में बैठा दिया गया| बुजुर्ग ने जैसे ही कमरे का दरवाजा खोला रानी अंदर को भाग गई|बुजुर्ग वापस आया और राजा को बताया कि आपकी रानी किसी वैश्या की बेटी लगती है|राजाने अपनी सास को बुलाकर कुछ सख्ती से पूछा तो उसने बताया कि उनकी कोई औलाद नहीं थी इस लिए उन्होंने इस बेटी को एक वैश्या से गोद लिया था|राजा ने बुजुर्ग से पूछा कि तुम्हें कैसे पता चला कि रानी वैश्या की बेटी है तो बुजुर्ग ने जवाब दिया किसी भी नंगी औरत के सामने जाने पर औरत अपने अंगों को छिपा कर सिकुड़ कर बैठ जाती है पर रानी मुझे देखते ही भाग गई थी| राजा ने बुजुर्ग के तजुर्बे से खुश होकर उसको इनाम में एक पाव आटा और देदिया| अब बुजुर्ग को एक किलो आटा रोज का मिलने लग गया|
एक दिन राजा ने बुजुर्ग को बुला कर पूछा कि अब आप मुझे मेरे बारे में कुछ बताइए|बुजुर्ग ने बेझिझक कहा आप तो किसी बनिए के बेटे हो|राजा को सुन कर गस्सा भी आया और हैरानी भी हुई| राजा उसी समय उठा और अपनी माँ के पास गया| तलवार अपनी गर्दन पर रख कर बोला कि माँ सच सच बता में किसका बेटा हूँ नहीं तो मैं अपनी जान दे दूंगा| माँ डर गई और बताया कि तुम्हारे पिताजी राज्य के काम से बाहर ही रहा करते थे|यहाँ एक मुनीम रहता था तुम उसी की औलाद हो|राजाने बुजुर्ग से आकर पूछा कि तुम्हें कैसे पता चला कि में बनिए का बेटा हूँ तो बुजुर्ग ने जवाब दिया कि मैंने आप को लाख लाख टके की एक एक बात बताई और आप ने उसकी कीमत क्या रखी एक पाव आटा? जिस से इस बात का पता चलता है कि आप बनिए के बेटे हो|राजाने बुजुर्ग के तजुर्बे से खुश होकर बुजुर्ग को अपने मंत्री मंडल में शामिल कर लिया|

29 comments:

  1. वाह जी वाह लाख टके की बात वो भी चार बार फ़िर भी सिर्फ़ एक पाव आटा मिला, तो हुआ ना बनिए की औलाद।

    ReplyDelete
  2. लाख टके की कहानी बहुत अच्छी लगी.

    ReplyDelete
  3. बहुत रोचक और सुन्दर कहानी..

    ReplyDelete
  4. बेहद रोचक कहानी. आभार.

    ReplyDelete
  5. बहुत सुन्दर और उपयोगी प्रस्तुति!
    राम-राम!

    ReplyDelete
  6. एक लोग कथा की तरह रोचक। बधाई॥

    ReplyDelete
  7. बहुत ही खुबसूरत ....

    ReplyDelete
  8. बेहद कीसुन्दर नीति -कथा ,रोचक ,मनो-रंजक ,तजुर्बे को समर्पित .

    ReplyDelete
  9. बेहद कीसुन्दर नीति -कथा ,रोचक ,मनो-रंजक ,तजुर्बे को समर्पित .
    दिल के मामले में भी कन्याओं से सौतेला व्यवहार .
    Girls face bias in heart surgery too
    वाह! रे !भारतीय रीति-रिवाज़ और संस्कृति .THE TIMES OF इंडिया की यह सुर्खी आगे कुछ लिखने की गुंजाइश भी नहीं छोडती .फिर भी इस खबर के मुताबिक़ एक बात साफ़ है जान लेवा मेडिकल कंडीशंस ,प्राण पखेरू ले उड़ने वाली बीमारियों के मामले में भी भारतीय समाज लड़कियों के साथ दुभांत करता है ।
    अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में संपन्न एक ताज़ा अध्ययन के मुताबिक़ लड़कों को यहाँ इन जीवन रक्षक मामलों में भी हार्ट सर्जरी कराने के ज्यादा मौके मिलतें हैं .
    मेडिकल जर्नल 'हार्ट 'में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार ऐसे ४०५ माँ -बाप से जिनके बच्चों की उम्र १२ साल तक थी तथा जिन्हें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में ELECTIVE PEDIATRIC CARDIAC सर्जरी करवाने की सलाह दी गई थी , लड़कियों के मामले में कुल ४४%लड़कियों को यह सर्जरी मुहैया करवाई गई जबकी ७० %लड़कों को इसका लाभ मिला ।
    १३४ में से कुल ५९ लड़कियों के माँ -बाप इस शल्य के लिए आगे आये जबकी २७१ में से १८९ लड़कों के माँ -बाप ने पहल की ।
    प्रत्येक ७० लड़कों के पीछे सिर्फ २२ लड़कियों को ही 'जन्म जात हृद -विकारों 'की सर्जरी करवाने का मौक़ा मेरे हिन्दुस्तान में मिल रहा है .जबकी यही उपयुक्त समय होता है इन जन्म जात विकारों से निजात का .
    बेटियों पर हो रहा,
    यह कैसा अत्याचार है |
    एक आँख रो रही है,
    और एक शर्मसार है |(ब्लोगर: सुशीलकुमार जी की कविता का मुखड़ा )

    ReplyDelete
  10. पढ़ते-पढ़ते खीझ रहा था कि कहानी तो मजेदार है लेकिन राजा, क्या एक पाव आटा..एक पाव आटा बढ़ा रहा है, एक अशर्फी क्यों नहीं बढ़ाता अंत पढ़कर एक पाव आटे का मर्म भी जाना। ...रोचक कथा।

    ReplyDelete
  11. बेहद रोचक कहानी उपयोगी प्रस्तुति!

    ReplyDelete
  12. आटे में लिपटा अद्भुत ज्ञान!! बुजुर्ग का अनुभव है उनकी असली पहचान!!बहुत सुन्दर!!

    ReplyDelete
  13. अच्छी बोध कथा .

    ReplyDelete
  14. ऐसा लग रहा था कि सत्य कह कर बुजुर्ग अपनी जान गँवा बैठेगा,किंतु राजा का चरित्र "राजा" की तरह ही रहा.सुंदर कथा.

    ReplyDelete
  15. इस बोध कथा से अच्छी सीख मिलती है । मेर पोस्ट पर आकर मेरा भी मनोबल बढाएं । धन्यवाद ।

    ReplyDelete
  16. bahut sunder katha ke liye hardik aabhaar,thanks alot for the same
    dr.bhoopendra
    rewa

    ReplyDelete
  17. बहुत रोचक और सुन्दर कहानी..

    ReplyDelete
  18. यह कथा ये सिद्ध करती है कि अनुभव से मिला ज्ञान ज्यादा उपयागी होता है।

    ReplyDelete
  19. बहुत सुन्दर प्रेरक कथा...

    ReplyDelete
  20. बहुत बढ़िया लगा! बेहतरीन प्रस्तुती!
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

    ReplyDelete
  21. प्रेरक ... कहानी बहुत कुछ कह जाती है ...

    ReplyDelete
  22. बहुत रोचक कहानी है |लिखने का तरीका भी बहुत अच्छा लगा |बधाई |
    आशा

    ReplyDelete
  23. आपको मेरी तरफ से नवरात्री की ढेरों शुभकामनाएं. .
    जय माता दी..

    ReplyDelete
  24. कहानी अच्छी और ज्ञानवर्धक है , एक बार पुन: पढूंगा ताकि अक्षरस: याद हो जाय , समयाभाव के कारण आजकल ब्लॉग जगत में आना-जाना कम हो गया है,
    फिलहाल उपरोक्त पोस्ट हेतु आपका आभार व्यक्त करता हूँ >नवरात्री की ढेरों शुभकामनाएं. .
    जय माता दी..

    ReplyDelete
  25. रोचक कहानी. आभार.

    ReplyDelete