Sunday, July 31, 2011

बैराग्य

भोगे रोगभयं कुले च्युतिभयं वित्ते नृपालाद भयं
माने दैन्य भयं बले रिपुभयं रुपे जराया भयं||
शास्त्रे वादभयं गुणे खलभयं काये कृतान्ताभ्दयं
सर्व वस्तु भयावहं भुवि नृणा बैराग्य मेवाभयं||
भोग में रोग का भय है,ऊँचे कुल में पतन का भय है, धन में राजा का भय है मान में दीनता का भय है, बल में शत्रुका भय है तथा रूप में बृद्धावस्था का भय है, शास्त्र में वाद-विवाद का भय है, गुण में दुष्ट जनों का भय है तथा शरीरमें कालका भय है| इस प्रकार संसार में मनुष्य के लिए सभी वस्तुएं भयपूर्ण हैं, भय से रहित तो केवल बैराग्य हीहै|

30 comments:

  1. बहुत सुन्दर शिक्षाप्रद प्रस्तुति के लिए आपका आभार.

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  2. भय से मुक्ति का मार्ग वैराग्य में निहित है. भय की इससे बढ़िया औषधि और क्या हो सकती है.

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  3. भय से रहित होना ही वैराग्य है।

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  4. वाह!
    बहुत सुन्दर पोस्ट!
    --
    पूरे 36 घंटे बाद नेट पर आया हूँ!
    धीरे-धीरे सबके यहाँ पहुँचने की कोशिश कर रहा हूँ!

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  5. वैराग्य निर्भयता के लिए ही है। निर्भयता सूचक ही है। मोह की गुलामी से मुक्ति ही है सभी भय का मूल कारण क्रोध, मान,माया और लोभ है।

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  6. बहुत उत्तम प्रस्तुति....

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  7. बहुत ही उतम विचार को प्रस्तुत करती पोस्ट...

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  8. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  9. बहुत सुन्दर शिक्षाप्रद प्रस्तुति

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  10. अब इतने सुन्दर और प्रेरक दोहे कहाँ मिलते हैं.. बचपन में किताबों में पढ़ा करते थे.. अब तो बच्चे ठीक से उच्चारण भी नहीं कर पाते.. अत्यंत प्रेरक!!

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  11. बहुत सुन्दर प्रस्तुति के लिए आपका आभार.

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  12. बहुत सुंदर रचना ! लाजवाब प्रस्तुती!

    आपके पास दोस्तो का ख़ज़ाना है,
    पर ये दोस्त आपका पुराना है,
    इस दोस्त को भुला ना देना कभी,
    क्यू की ये दोस्त आपकी दोस्ती का दीवाना है

    ⁀‵⁀) ✫ ✫ ✫.
    `⋎´✫¸.•°*”˜˜”*°•✫
    ..✫¸.•°*”˜˜”*°•.✫
    ☻/ღ˚ •。* ˚ ˚✰˚ ˛★* 。 ღ˛° 。* °♥ ˚ • ★ *˚ .ღ 。.................
    /▌*˛˚ღ •˚HAPPY FRIENDSHIP DAY MY FRENDS ˚ ✰* ★
    / .. ˚. ★ ˛ ˚ ✰。˚ ˚ღ。* ˛˚ 。✰˚* ˚ ★ღ

    !!मित्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाये!!

    फ्रेंडशिप डे स्पेशल पोस्ट पर आपका स्वागत है!
    मित्रता एक वरदान

    शुभकामनायें

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  13. मुझे क्षमा करे की मैं आपके ब्लॉग पे नहीं आ सका क्यों की मैं कुछ आपने कामों मैं इतना वयस्थ था की आपको मैं आपना वक्त नहीं दे पाया
    आज फिर मैंने आपके लेख और आपके कलम की स्याही को देखा और पढ़ा अति उत्तम और अति सुन्दर जिसे बया करना मेरे शब्दों के सागर में शब्द ही नहीं है
    पर लगता है आप भी मेरी तरह मेरे ब्लॉग पे नहीं आये जिस की मुझे अति निराशा हुई है
    http://kuchtumkahokuchmekahu.blogspot.com/

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  14. अति उत्तम श्लोक के माध्यम से सुन्दर सन्देश.वैसे भय बिन न प्रीत होय गोपाला भी सत्य है.

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  15. आप को बहुत बहुत धन्यवाद की आपने मेरे ब्लॉग पे आने के लिये अपना किमती समय निकला
    और अपने विचारो से मुझे अवगत करवाया मैं आशा करता हु की आगे भी आपका योगदान मिलता रहेगा
    बस आप से १ ही शिकायत है की मैं अपनी हर पोस्ट आप तक पहुचना चाहता हु पर अभी तक आप ने मेरे ब्लॉग का अनुसरण या मैं कहू की मेरे ब्लॉग के नियमित सदस्य नहीं है जो में आप से आशा करता हु की आप मेरी इस मन की समस्या का निवारण करेगे
    आपका ब्लॉग साथी
    दिनेश पारीक
    http://kuchtumkahokuchmekahu.blogspot.com/

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  16. वाह!
    बहुत सुन्दर पोस्ट!
    --

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  17. अगर आपको प्रेमचन्द की कहानिया पसंद हैं तो आपका मेरे ब्लॉग पर स्वागत है |
    http://premchand-sahitya.blogspot.com/

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  18. बहुत सुन्दर और सार्थक पोस्ट..

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  19. बहुत समय से आपकी नई पोस्ट नहीं आई है.
    इस बीच मैंने 'सीताजन्म आध्यात्मिक चिंतन-३' पर
    अगली पोस्ट लिखी है.

    समय मिलने पर मेरे ब्लॉग पर आईयेगा.

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  20. जन लोकपाल के पहले चरण की सफलता पर बधाई.

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  21. भय रहित होने के लिए वैराग्य का सहारा लेना होगा।
    प्रेरक श्लोक।

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  22. जैसे ही आसमान पे देखा हिलाले-ईद.
    दुनिया ख़ुशी से झूम उठी है,मना ले ईद.
    ईद मुबारक

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  23. बहुत सुंदर ! उम्दा प्रस्तुती!
    आपको एवं आपके परिवार को गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनायें!
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

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  24. बहुत सुन्दर प्रस्तुति

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  25. सार्थक और सुन्दर पोस्ट बधाई और शुभकामनाएं

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  26. बहुत ही सुंदर प्रस्तुति । पर भय के भय से जीना तो नही छोड सकते । वो कहते हैं ना कि, " The worst of all fears is fear itself".

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  27. गृहस्थ जीवन में तपने के बाद ही वैराग्य का आनंद है।

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