जब भी चली है पेड़ पर कुल्हाड़ी पेड़ या उसकी शाखाओं पर माँ गिरी है सब से पहले टुकड़े होकर| सुंदर बिम्ब का प्रयोग ...एकदम अर्थ संप्रेषित करता हुआ ...बहुत खूब ...शुभकामनायें
हिन्दी ब्लागजगत के आप जैसे चिर-परिचित व्यक्तित्व ने मेरे शिक्षणकाल के ब्लाग "नजरिया" पर आकर अपनी अमूल्य टिप्पणी से मेरा मार्गदर्शऩ व उत्साहवर्द्धऩ किया उसके लिये आपको विनम्र धन्यवाद... अलग-अलग विषय से सम्बद्ध मेरे अन्य ब्लाग "जिन्दगी के रंग" व "स्वास्थ्य-सुख" भी आपके अवलोकन व आशीर्वचन के साथ ही आपके अमूल्य समर्थन के भी अभिलाषी हैं । कृपया ऐसे ही अपने बहुमूल्य सुझावों के साथ अपना स्नेह बनाए रखें । पुनः धन्यवाद सहित...
छोटा मगर सोलिड...
ReplyDeleteमाँ का वर्णन कैसा भी हो, उसी की तरह खूबसूरत होता है...
बहुत गहन बात ..
ReplyDeleteपूजा जी पूरी तरह सहमत....
ReplyDeleteरचना छोटी होने से कोई फर्क नहीं पड़ता...
जब भी चली है पेड़ पर कुल्हाड़ी
ReplyDeleteपेड़ या उसकी शाखाओं पर
माँ गिरी है सब से पहले
टुकड़े होकर|
सुंदर बिम्ब का प्रयोग ...एकदम अर्थ संप्रेषित करता हुआ ...बहुत खूब ...शुभकामनायें
Great Its really the Lines For think.
ReplyDeleteGreat
गागर मे सागर भर डाला
ReplyDeleteचंद शब्दों में सब कह डाला
माँ क्या होती है जीवन में
सरलता से समझा सब डाला
बहुत खूब ॥
सार्थक प्रस्तुति !
ReplyDelete"dekhn main choto lagey , ghv karey gambhir...."
ReplyDeletechand panktiyan bahut badi baat kh gai....
abhaar.
गागर में सागर -यह रचना बताती है,की किस प्रकार एक पत्नी अपने पति की रक्क्षक होती है,और पुत्र द्वारा माँ की तारीफ़ करना पूर्ण उचित है.
ReplyDeleteबहुत ही सुन्दर बिम्ब है ... छोटी सी मगर बहुत असरदार कविता !
ReplyDeleteये छोटी कविता किसी भी बड़ी कविता को परास्त करने की माद्दा रखती है।
ReplyDeleteसुन्दर अभिव्यक्ति।
aapne to gagar me sagar bhar diya wali kahavat ko charitarth kar diya.
ReplyDeleteek samvedansheel prastuti---
poonam
MUNNWAR RANA KE BAAD 'MAA' KI SABSE ACHCHI PARIBHASHA AAJ PADHI HAI
ReplyDeleteSHUKRIYA
badi sundar soch... pita ped maa chhaal aur bacchey sakha ..kavita umda
ReplyDeleteब्लॉग या वेबसाइट से कमाओ हजारो रुपये...
ReplyDeleteTo know more about it click on following link...
http://planet4orkut.blogspot.com/2010/08/blog-post_9159.html
माँ की महिमा दर्शाती बहुत शानदार प्रस्तुति...
ReplyDeleteहिन्दी ब्लागजगत के आप जैसे चिर-परिचित व्यक्तित्व ने मेरे शिक्षणकाल के ब्लाग "नजरिया" पर आकर अपनी अमूल्य टिप्पणी से मेरा मार्गदर्शऩ व उत्साहवर्द्धऩ किया उसके लिये आपको विनम्र धन्यवाद...
ReplyDeleteअलग-अलग विषय से सम्बद्ध मेरे अन्य ब्लाग "जिन्दगी के रंग" व "स्वास्थ्य-सुख" भी आपके अवलोकन व आशीर्वचन के साथ ही आपके अमूल्य समर्थन के भी अभिलाषी हैं । कृपया ऐसे ही अपने बहुमूल्य सुझावों के साथ अपना स्नेह बनाए रखें । पुनः धन्यवाद सहित...
छोटी लेकिन बहुत मोटी बात!
ReplyDeleteसुन्दर रचना |
ह्रद्यस्पर्षी पंक्तियां ! मैं आप को फ़ोलो कर रहा हूं ! मुझे फ़ोलो कर उत्साह बढ़ाएं !
ReplyDeleteएक एक शब्द सही निरूपण करती हुई. बेहद ख़ूबसूरत और भावनापूर्ण कविता है.
ReplyDelete