Thursday, November 25, 2010

"माँ"

पिता पेड़ है                                                                            
हम शाखाएं  हैं उसकी  
माँ छाल की तरह चिपकी हुई है
पूरे पेड़ पर
जब भी चली है पेड़ पर कुल्हाड़ी 
पेड़ या उसकी शाखाओं पर 
माँ गिरी है सब से पहले
टुकड़े होकर|

20 comments:

  1. छोटा मगर सोलिड...
    माँ का वर्णन कैसा भी हो, उसी की तरह खूबसूरत होता है...

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  2. पूजा जी पूरी तरह सहमत....
    रचना छोटी होने से कोई फर्क नहीं पड़ता...

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  3. जब भी चली है पेड़ पर कुल्हाड़ी
    पेड़ या उसकी शाखाओं पर
    माँ गिरी है सब से पहले
    टुकड़े होकर|
    सुंदर बिम्ब का प्रयोग ...एकदम अर्थ संप्रेषित करता हुआ ...बहुत खूब ...शुभकामनायें

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  4. गागर मे सागर भर डाला
    चंद शब्दों में सब कह डाला
    माँ क्या होती है जीवन में
    सरलता से समझा सब डाला

    बहुत खूब ॥

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  5. सार्थक प्रस्तुति !

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  6. "dekhn main choto lagey , ghv karey gambhir...."
    chand panktiyan bahut badi baat kh gai....
    abhaar.

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  7. गागर में सागर -यह रचना बताती है,की किस प्रकार एक पत्नी अपने पति की रक्क्षक होती है,और पुत्र द्वारा माँ की तारीफ़ करना पूर्ण उचित है.

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  8. बहुत ही सुन्दर बिम्ब है ... छोटी सी मगर बहुत असरदार कविता !

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  9. ये छोटी कविता किसी भी बड़ी कविता को परास्त करने की माद्दा रखती है।
    सुन्दर अभिव्यक्ति।

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  10. aapne to gagar me sagar bhar diya wali kahavat ko charitarth kar diya.
    ek samvedansheel prastuti---
    poonam

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  11. MUNNWAR RANA KE BAAD 'MAA' KI SABSE ACHCHI PARIBHASHA AAJ PADHI HAI
    SHUKRIYA

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  13. माँ की महिमा दर्शाती बहुत शानदार प्रस्तुति...

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  14. हिन्दी ब्लागजगत के आप जैसे चिर-परिचित व्यक्तित्व ने मेरे शिक्षणकाल के ब्लाग "नजरिया" पर आकर अपनी अमूल्य टिप्पणी से मेरा मार्गदर्शऩ व उत्साहवर्द्धऩ किया उसके लिये आपको विनम्र धन्यवाद...
    अलग-अलग विषय से सम्बद्ध मेरे अन्य ब्लाग "जिन्दगी के रंग" व "स्वास्थ्य-सुख" भी आपके अवलोकन व आशीर्वचन के साथ ही आपके अमूल्य समर्थन के भी अभिलाषी हैं । कृपया ऐसे ही अपने बहुमूल्य सुझावों के साथ अपना स्नेह बनाए रखें । पुनः धन्यवाद सहित...

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  15. छोटी लेकिन बहुत मोटी बात!
    सुन्दर रचना |

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  16. ह्रद्यस्पर्षी पंक्तियां ! मैं आप को फ़ोलो कर रहा हूं ! मुझे फ़ोलो कर उत्साह बढ़ाएं !

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  17. एक एक शब्द सही निरूपण करती हुई. बेहद ख़ूबसूरत और भावनापूर्ण कविता है.

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